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Thursday, June 28, 2012

आज सब विचित्र हे


आज कुछ अलग हे
मेरे लिए हर कुछ, आज व्यर्थ हे
नहीं मुझे किसी मंजील का ध्यास हे
किसी कर्म पे विश्वास हे
मेरे लिए आज हर प्यास बकवास हे

कल जिन चीजो में खो सा जाता था
परसों जिन सपनो को मेरा मन अपनाताथा
जो कुछ देखे मन थम सा जाता था
  मेरी जागी राते  आज वो सपने निघलजाती हे

आज सोच... शुरवात और अंत के बिच भटक रही हे
वो सब चित्र जो आखोतले मनका रास्ता भूले हे
छीन्न  विछीन्न  हे
विचित्र हे
हर चित्र विचित्र हे
सर्वत्र विचित्र हे

आज कुछ अलग हे
मेरे पास जो हे, या जो हे मेरा हिस्सा
या वो सब जो हे परे... पराया हे
हर सास एक सजा हे
आज सब विचित्र हे
~


(काम जारी हें , असुविधा के लिए खेद हें)
॥ विश्वामित्र ॥

आज कुछ ख़ास हे

आज हर चीज़ में कुछ ख़ास बात हे
आज हर बात में जान की बरसात हे
आज में किसी तलाश में हु
आज में किसीकी तलाश में हु

एक आशा हे, विश्वास हे
आज में काफी व्यस्त हु
करने को काम हज़ार हे
मन ख़ुशी से बेजार हे

लिखे हुए शब्द जो आखें तो पढ़ लेती थी, 
पर मन समज नहीं पता था
आज समज और नासमज के भीतर हे
हर चीज़ कुछ कहानी बता रही हे
हर गीत अपना मतलब गा रहा हे

आज कुछ अलग हे
जो मेरे पास हे, या जो हे मेरे भीतर
जो मेरी समज या नासमज के नजदीक 
या जो हे परे

सब मेरा हे
हर सास, एक एहसास हे
आज कुछ ख़ास हे

~

(काम जारी हें , असुविधा के लिए खेद हें)
॥ विश्वामित्र ॥